आखिर क्या राज़ है छप्पन भोग का - a2zfact | all facts

आखिर क्या राज़ है छप्पन भोग का


जब भी हम भोजन की बात करते हैं या किसी किस्से-कहानी में खाने की बात सुनते हैं तो हमें छप्पन भोग का ज़िक्र अवश्य ही मिलता है लेकिन क्या आपको पता है कि यह छप्पन भोग बना कैसे ? इस छप्पन भोग के खाने के पीछे का रहस्य क्या है ? और इसकी शुरुआत कब से हुई थी ? यदि, नहीं तो आज हम आप सभी को इस छप्पन भोग की कथा से अवगत कराएँगे |

ऐसा कहा जाता है कि गोकुल धाम में जब बालकृष्ण अपनी मैय्या यशोदा माँ के साथ रहते थे तब उनकी मैय्या उन्हें प्रतिदिन आठ पहर अर्थात कुल आठ बार खाना खिलाती थीं | जब इंद्रदेव ने गोकुल पर अपनी बारिश का कहर बरपाया था तब कृष्ण जी ने कुल सात दिनों तक बिना कुछ खाए उस गोवर्धन पर्वत को एक ऊँगली पर उठाया था लेकिन जब बारिश शांत हो गयी और सारे गोकुलवासी और उनके घरवाले पर्वत के नीचे से बाहर निकल आये तब सभी को यह एहसास हुआ कि कान्हा ने सात दिनों से कुछ नहीं खाया है |

तब यशोदा माँ और सभी गोकुलवासियों ने कृष्ण जी के लिए हर दिन के आठ पहर के हिसाब से सात दिनों को मिलाकर कुल छप्पन प्रकार (7 दिन X 8 पहर = 56) के पकवान बनाये | इसके साथ ही सभी गोपियों ने लगातार एक माह तक पवित्र यमुना नदी में स्नान किया और माँ कात्यायिनी देवी की पूरे श्रद्धा से पूजा-अर्चना की ताकि उन्हें पतिरूप में श्रीकृष्ण ही मिलें | श्रीकृष्ण ने यह जानकर उन सभी को उनकी इच्छापूर्ति होने का आश्वासन दिया और इसी ख़ुशी के चलते उन्होंने श्रीकृष्ण के लिए छप्पन भोग बनाये |

ऐसा कहा जाता है कि गोलोक में जिस कमल के ऊपर श्रीकृष्ण अपनी प्रियतमा राधारानी के साथ विराजमान में रहते हैं वह कमल कुल तीन प्रकार की परतों से मिलकर बना होता है जिसमें क्रमशः प्रथम परत में 'आठ', दूसरी परत में 'सोलह' एवं तीसरी और आखिरी परत में 'बत्तीस' गोपियाँ पंखुड़ियों के रूप में अपने प्रिय कृष्ण जी के साथ रहती हैं |

इस छप्पन भोग के बारे में हम आपको यह भी बताते चलें कि यह दही से प्रारम्भ होता है और इलायची पर ख़त्म लेकिन क्या आप इन सभी छप्पन भोगों के नाम जानते हैं ? यदि नहीं, तो उनके संस्कृत नाम कुछ इस प्रकार हैं -

1. सूप 2. दधिशाकजा 3. बालका 4. बटक 5. परिष्टाश्च 6. चक्राम 7. धृतपूर 8. दधि 9. खंडमंडल 10. सुफलाढय़ा 11. शाक 12. पायस 13. हैयंगपीनम 14. पर्पट 15. सुवत 16. सिता 17. मोहनभोग 18. मधुर 19. अम्ल 20. प्रलेह 21. सिखरिणी 22. इक्षुखेरिणी 23. मधुशीर्षक 24. शतपत्र 25. चिल्डिका 26. वायुपूर 27. स्थूली 28. गोधूम 29. दधिरूप 30. सौधान 31. दधि 32. मंडूरी 33. शक्तिका 34. संघाय 35. फल 36. लवण 37. तिक्त 38. सदिका 39. अवलेह 40. त्रिकोण 41. फेणिका 42. सधिद्रक 43. सुधाकुंडलिका 44. चन्द्रकला 45. कर्पूरनाड़ी 46. परिखा 47. मोदक 48. मंडका 49. गोघृत 50. कूपिका 51. लसिका 52. सुफला 53. तांबूल 54. कषाय 55. कटु 56. भक्त