वैसे तो भारत में हर
तरह की संस्कृति का समावेश है लेकिन यह देश अपने आप में कई अद्भुत रहस्यों को भी समेटे
हुए है | यदि आप इस देश को पूरा घूमना प्रारम्भ करेंगे तो आप पाएंगे कि देश के हर हिस्से
एवं हर कोने में कोई ना कोई हैरत में डाल देने वाला राज छुपा बैठा है | आज हम आपको
ऐसे ही एक गांव से सम्बंधित रहस्य के बारे में बताएँगे |
भारत के कई गाँवों
को घूमने पर आपको पता चलेगा कि हर गाँव अपने आप में अनूठा है | ऐसी ही एक विशेषता को
अपने अंदर समेटे हुए है राजस्थान के बाड़मेर जिले का पुरातन 'किराडू गाँव' | ऐसा कहा
जाता है कि इस गाँव को एक ऋषि ने श्राप दिया था कि जो लोग इस गाँव में प्रवेश करेंगे
वे तुरंत पत्थर की मूर्ति बन जायेंगे | कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह दुष्प्रभाव
किसी बुरी आत्मा के कारण है | इसी कारण से इस गाँव में जाने की बात सोचने से आज भी
लोगों की आत्मा काँप उठती है लेकिन इस श्राप या दुष्प्रभाव के पीछे का असली कारण क्या
है ?
कहा जाता है आज से
करीब 800 साल से भी पहले इस गाँव में परमार वंश के राजाओं का शासन चलता था | यह गाँव
धन-धन्य से पूरी तरह से संपन्न था | सभी निरोगी एवं खुश रहते थे | उसी गाँव के पास
एक बहुत पूज्यनीय ऋषि अपने शिष्यों के साथ रहते थे | एक दिन साधु महाराज को इच्छा हुई
कि क्यों ना कुछ दिनों के लिए किसी अन्य तीर्थ भूमि के दर्शन किये जाएं | यह सोचकर
उन्होंने अकेले तीर्थ यात्रा पर जाने का मन बनाया और अपने सभी शिष्यों के खाने-पीने
एवं देखरेख का ज़िम्मा उस गाँव में रहने वाले लोगों पर छोड़कर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान
किया |
साधु बाबा के जाने
के कुछ दिनों के बाद गाँव के लोगों ने उनके शिष्यों को भोजन-पानी देना बंद कर दिया
जिससे ऋषि महाराज के शिष्य बीमार होने लगे | उनकी मदद करने वालो में से सिर्फ एक कुम्हारिन
स्त्री थी लेकिन उसकी मदद के बावजूद साधु महाराज के शिष्य कमजोर एवं बीमार हो गए |
कुछ दिनों बाद जब साधु
महाराज गाँव लौटे तब अपने शिष्यों की यह हालत देखकर उन्हें गाँव वालों पर अत्यधिक क्रोध
आया | उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर साधु-संतों की सेवा तक नहीं की जाती ऐसी जगह पर
किसी भी मनुष्य का रहना उचित नहीं है | यह कहकर उन्होंने अपने कमंडल से जल लिया ओर
पूरे गाँव के लोगों को श्राप दिया कि शाम होने के बाद इस गाँव का प्रत्येक व्यक्ति
जिस अवस्था में है उसी अवस्था में जड़ होकर पत्थर के रूप में परिवर्तित हो जायेगा |
कुछ समय बाद उन्हें
यह ज्ञात हुआ कि एक कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की अच्छी तरह से देखभाल करने की कोशिश
की थी | तब उन्होंने उस कुम्हारिन को अपने पास बुलाया और कहा कि शाम होने से पहले इस
गाँव से जितना जल्दी हो सके बाहर निकल जाओ और याद रहे बाहर जाते समय पीछे मुड़कर मत
देखना | यह सुनकर कुम्हारिन गाँव से बाहर की तरफ जाने लगी लेकिन अंत में ना चाहते हुए
भी कौतूहलतावश वह पीछे मुड़ गयी ओर अगले ही क्षण वह पत्थर की मूर्ति में परिवर्तित हो
गयी |
इस जगह के आसपास परमार
राजाओं द्वारा बनवाए गए कई मंदिरों में से कुछ मदिर आज भी अच्छी हालत में हैं जिन्हें
देखने कई विदेशी सैलानी हर साल सैकड़ों की संख्या में पहुँचते हैं लेकिन 'किराडू गाँव'
की इस घटना को जानने वाले आसपास के कई गाँववाले आज भी उस गाँव में जाने से डरते हैं
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