जानिये क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव को सरसों का तेल - a2zfact | all facts

जानिये क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव को सरसों का तेल


वैसे तो शनिदेव को अक्सर एक क्रोधी देवता माना जाता है लेकिन बहुत ही कम लोगों को यह ज्ञात है कि शनि देव भी कभी-कभी हंसी मजाक करते हैं | इसी वजह से उन्हें एक बार भयानक कष्ट का सामना करना पड़ा था | इससे जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है और उन्हें तेल चढ़ाने की मुख्य वजह भी इसी कहानी में छुपी है |

एक बार रामभक्त हनुमान जी को उनके प्रभु यानि श्रीराम जी ने एक जरुरी काम दिया | उस काम को उन्होंने करना आरम्भ ही किया था कि शनिदेवता कि नज़र उन पर पड़ी | अपने विनोदी स्वभाव के चलते उन्होंने सोचा क्यों ना बजरंगबली से कोई मजाक किया जाये | वे हनुमान जी के पास गए और उनके कार्य में बाधा उत्पन्न करने लगे |

शुरुआत में हनुमान जी अपने कार्य में ही व्यस्त रहे लेकिन कुछ देर बाद जब उनका ध्यान अपने काम से हटने लगा तो उन्होंने शनिदेव से कहा कि वे उन्हें अपना कार्य करने दे | आखिर में उन्होंने शनिदेव को अंतिम चेतावनी दी कि अगर शनिदेव ने उन्हें उनका काम नहीं करने दिया तो उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा लेकिन इस बात का भी शनिदेव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा |

अंततः हनुमान जी ने शनिदेव को अपनी पूँछ में कसकर लपेट लिया और वापस अपने काम को करने में व्यस्त हो गए | ऐसा कहा जाता है कि जब श्रीराम हनुमान जी को कोई कार्य करने को कहते थे तब हनुमान जी का ध्यान सिर्फ अपने काम पर रहता था और वे पूरी दुनिया से हटकर सिर्फ अपने काम में मन लगाते थे जब तक कि उनके प्रभु श्रीराम जी का दिया गया कार्य पूर्ण न हो जाये |

इधर जब हनुमान जी अपना कार्य करने में व्यस्त थे | शनिदेव अपने आप को हनुमान जी की पूँछ से छुड़ाने में लगे थे | उन्होंने बहुत प्रयास किया परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली | अंत में हारकर उन्होंने बजरंगबली से विनती की उन्हें छोड़ दें लेकिन हनुमान जी तो अपने प्रभु का कार्य करने में व्यस्त थे | जब हनुमान जी अपना काम कर रहे थे तब उन्हें यह ध्यान ही नहीं था कि शनिदेव उनकी पूँछ में बँधे हैं | इस कारण वे अपनी पूँछ को इधर-उधर हिला रहे थे जिससे शनिदेव को भीषण क्षति पहुँच रही थी |

अंत में जब हनुमान जी ने अपना काम ख़त्म किया तब उन्हें याद आया कि उनकी पूँछ में शनिदेव बँधे हुए हैं | उन्होंने तत्काल शनिदेव को अपनी पूँछ की पकड़ से आज़ाद किया | इसके बाद शनिदेव ने हनुमान जी से अपने गलत बर्ताव के लिए क्षमा माँगी और साथ में यह भी कहा कि आज से आपकी और श्रीराम की पूजा करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा रहेगी |

साथ ही हनुमान जी से कहा कि आपकी पूँछ में बँधे रहने से मुझे कई जगह पर चोटें आई है इसलिए इस कष्ट का कोई निवारण कीजिये | यह सुनकर हनुमान जी ने शनिदेव को सरसों का तेल लगाकर इसकी मालिश करने की सलाह दी | तब से ऐसा कहा जाता है कि जो लोग शनिवार के दिन सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करते हैं उन पर शनिदेव की विशेष कृपा दृष्टि बना रहती है |