शीर्षक पढ़ कर तो आप
भी चौक गए होंगे कि हनुमान जी का ऐसा कौन सा मदिर है जहाँ पर हनुमान जी अपने स्त्री
रूप में विराजमान हैं ? लेकिन यही बात सत्य है और इस मंदिर के बारे में सबसे खास बात
यह है कि इस मंदिर में मांगी हुई कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहती | यदि आप इस मंडी में
जाकर स्त्रीरूपी हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा करेंगे तो हनुमान जी आपकी हर एक मनोकामना
अवश्य पूरी करेंगे | शायद इसी कारण से इस मंदिर में रोज सैकड़ों की संख्या में लोग दर्शन
करने आते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर के पीछे का राज क्या है ?
यदि नहीं, तो आज हम
आपको इस मंदिर के रहस्य से अवगत कराएँगे | छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से करीबन 20 किलोमीटर
से भी अधिक की दूरी पर रतनपुर नाम के इस स्थान पर एक मंदिर बना हुआ है जिसे गिरजाबांध
के हनुमान मंदिर के नाम से पूरे देश में जाना जाता है | इस चमत्कार के चलते इस रतनपुर
नगरी को 'महामाया नगरी' के नाम से भी जाना जाता है | दुनिया के इकलौते इस स्त्रीरूपी
हनुमान मंदिर की स्थापना कथा भी कुछ इसी प्रकार से विचित्र है |
आज से कई हज़ार साल
पहले रतनपुर की इस धरती पर महाराज पृथ्वीदेवजू का शासन हुआ करता था | वे हनुमान जी
के बहुत बड़े भक्त भी थे | उनके राज्य में धन-धन्य की कोई कमी नहीं थी और राज्य में
किसी भी व्यक्ति की कोई कष्ट भी नहीं हुआ करता था | राजा पृथ्वीदेवजू को सिर्फ एक ही
बात की चिंता सताती थी और वह था उनका कोढ़ रोग | इस कोढ़ रोग के चलते ना ही वे किसी को
स्पर्श कर सकते थे और ना ही किसी के साथ घूमने-फिरने का आनंद प्राप्त कर सकते थे |
वे अक्सर सोचते कि उनका यह रोग ठीक कैसे होगा ?
ऐसा नहीं है कि उन्होंने
इलाज़ नहीं कराया | उनके स्वयं के राजवैद्य ने उन्हें कई तरह की जड़ी-बूटियों का मिश्रण
खिलाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ | यहाँ तक कि बाहर से कई वैद्य और चिकित्सक बुलवाये
गए लेकिन उनके स्वास्थ्य में अंश मात्र का भी फायदा नहीं हुआ | वे हर वक्त यही सोचते
रहते थे कि इस नरक जैसी ज़िन्दगी से मौत ही ज्यादा अच्छी है और यही सोचते हुए वे अपने
कमरे में लेटे हुए थे कि अचानक से उन्हें नींद आ गयी |
उन्हें एक विचित्र
स्वप्न दिखाई दिया | उन्होंने देखा कि हनुमान जी स्त्रीरूप में उन्हें दर्शन दे रहे
हैं | एक हाथ में रामनाम की माला और दूसरे हाँथ में लड्डू की थाली परन्तु उनके पीछे
कोई पूँछ नहीं थी और उनकी वेशभूषा एक स्त्री की तरह थी | इस प्रकार उन्होंने हनुमान
जी को पूर्ण स्त्री श्रृंगार में देखा | हनुमान जी ने उनसे कहा कि मैं तुम्हारी श्रद्धा
भक्ति से प्रसन्न हूँ | तुम्हे अपने कष्ट के निवारण के लिए एक मंदिर का निर्माण करना
होगा जिसमें मेरी यह स्वरुप विराजित करना होगा | मंदिर के निकट स्थित तालाब में जाकर
स्नान करने के बाद पूर्ण विधि से मेरी पूजा करना तब तुम्हारा यह कोढ़ रोग जड़ से ही नष्ट
हो जायेगा |
उठते ही राजा ने तुरंत
अपने राजपुरोहितों को बुलाकर अपने इस स्वप्न के बारे में बताया और उनसे राय मांगी
| अपने गुरुओं की सलाह से उन्होंने गिरजाबांध के मदिर का निर्माण करवाया लेकिन एक समस्या
अभी भी थी कि इस मंदिर में स्थापित्र करने वाली मूर्ति कहाँ से मंगवाई जाये ? उसी रात
को उन्हें स्वप्न में हनुमान जी ने फिर दर्शन दिया और कहा कि राजा तू चिंता मत कर और
सीधे महामाया कुण्ड जा वहाँ पर मेरी मूर्ति रखी हुई है | उसे लेकर आ और मदिर में विराजित
कर दे |
यह सुनकर अगले दिन
राजा महामाया कुण्ड पहुँचा परन्तु पूरे दिन की खोजबीन के बाद भी उसे वह मूर्ति नहीं
मिली | आखिर में वह निराश होकर महल को लौट आया और लेटा हुआ था तभी उसे स्वप्न में हनुमान
जी ने दर्शन देकर कहा कि तू घाट के उस हिस्से में जा जहाँ लोग स्नान करने जाते हैं
तुझे वह मूर्ति वही पर प्राप्त होगी |
अगले दिन बहुत ढूँढने
पर राजा को वह मूर्ति मिल ही गयी | उन्होंने देखा कि मूर्ति से एक अलग ही प्रकार का
तेज़ और चमक आ रही है | मूर्ति में हनुमान जी के पैरो के नीचे दो राक्षस दबे हुए थे और उनके एक कंधे में उनके प्रभु श्रीराम
और दूसरे कंधे पर लक्ष्मण जी विराजमान थे | राजा पृथ्वीदेवजू ने उस मूर्ति की उठाया
और विधिवत नहाकर उनकी स्थापना करके पूजा की |
उसके बाद राजा का कोढ़
रोग तुरंत ठीक होने लगा और कुछ ही समय बाद उनका यह रोग जड़ से ही समाप्त हो गया | ऐसा
कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण हनुमान जी की प्रेरणा से केवल राजा का ही नहीं
बल्कि सभी आम लोगो के कष्ट निवारण के लिए भी हुआ था इसलिए यदि इस गिरजाबांध में जाकर
तालाब में स्नान करने के बाद स्त्रीरूपी हनुमान जी की सच्चे मन से पूजा की जाये तो
आपके किसी भी कष्ट का निवारण तुरंत हो जायेगा |
