तो इस तरह प्राप्त हुआ था भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र - a2zfact | all facts

तो इस तरह प्राप्त हुआ था भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र


भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र की सहायता से कई राक्षसों और अधम व्यक्तियों को परलोक पहुँचाया | कृष्ण रूप में इसी की सहायता से उन्होंने शिशुपाल जैसे मूर्ख मनुष्य को सबक सिखाया और इसी चक्र ने अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र परीक्षित को अश्वश्थामा के ब्रम्हास्त्र के प्रहार से बचाया था | इसके अलावा और भी कई अवतारों में उन्होंने इस चक्र की मदद से हर अज्ञानी और मूर्ख को सबक सिखाया था लेकिन क्या आपको पता है कि उन्हें यह चक्र कैसे प्राप्त हुआ और उन्हें यह चक्र किसने प्रदान किया था ?

यदि नहीं, तो आज हम आपके इन सभी सवालों का समाधान करेंगे | ऐसा कहा जाता है कि इस दुनिया में भगवान शिव का विष्णु जी जैसा कोई भी भक्त नहीं है | एक बार भगवान विष्णु जी कि इच्छा हुई कि क्यों ना शिवजी की पूजा किसी अच्छे निर्मल स्थान पर की जाये | यह सोचकर उन्हें भगवान शिव की नगरी आज की वाराणसी अर्थात काशी नगरी का स्मरण हुआ और वे सीधे काशी की ओर निकल पड़े |

वे सर्वप्रथम स्नान करने के लिए काशी के निकट उपस्थित मणिकर्णिका घाट पर जा पहुँचे | वहाँ से नहाने के पश्चात उन्होंने निश्चय किया कि वे एक हज़ार स्वर्ण कमलों से भगवान शिव की आराधना करेंगे | यह सोचकर उन्होंने एक हज़ार स्वर्ण कमलों का प्रबंध कर लिया और अपनी स्तुति आरम्भ की |

जब विष्णु जी आराधन में लीन थे उसी समय उनके आराध्य भगवान शिव यह सब देख रहे थे कि अचानक शिव जी के मन में एक शरारत सूझी ओर उन्होंने उन हज़ार स्वर्ण कमलों में से एक कमल चुरा लिया | जब विष्णु जी की पूजा समाप्त होने वाली थी की तभी उन्हें पता चला कि उन स्वर्ण कमल पुष्पों में से एक कमल पुष्प कम है |

यह देखकर उन्होंने सोचा क्यों ना आखिरी कमल पुष्प के स्थान पर मै अपनी आँखें शिव जी को चढ़ा दूँ क्योंकि मुझे वेदों में कमलनयन भी कहा जाता है | यह सोचकर जैसे ही वे अपनी आँख चढ़ाने के लिए अग्रसर हुए कि तभी शिव जी ने उन्हें दर्शन दिया और कहा कि विष्णु जी आप जैसा मेरा अनन्य भक्त और कोई दूसरा हो ही नहीं सकता |

इसके साथ ही उन्होंने विष्णु जी से यह भी कहा कि क्योंकि आज कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी है और आज के दिन आपने मुझे प्रसन्न किया है इसलिए आज से यह तिथि 'बैकुंठ चतुर्दशी' के नाम से जानी जाएगी | उन्होंने विष्णु जी को सुदर्शन चक्र भी प्रदान किया और कहा कि तीनों लोकों में इस चक्र से बढ़कर कोई भी शक्तिशाली अस्त्र नहीं होगा और इसकी सहायता से आप किसी भी राक्षस का विनाश कर सकेंगे | अंत में उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति आज के दिन सबसे पहले आपकी और उसके बाद मेरी पूजा करेगा उसे निश्चित ही बैकुंठ धाम की प्राप्ति होगी |