मकर संक्रांति के एक
दिन पहले लोहड़ी का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है | यह उत्सव मुख्यतः भारत के
उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है | इस पर्व में लोग एक जलती हुई आग के चारों ओर घेरा
बनाकर बैठ जाते हैं और रेवड़ी एवं लावा जैसी कई मीठी वस्तुओं का सेवन करते हैं | आग
के चारों ओर बैठने का मुख्य कारण अग्निदेवता को सम्मान देना है क्योंकि ऐसा माना जाता
है कि अग्निदेव इस त्यौहार के मुख्य अतिथि होते हैं | इसलिए उनका सम्मान करने हेतु
लोग आग के चारों ओर समूह बनाकर बैठते हैं |
इस त्यौहार को मनाने
के लिए लोग अच्छे कपडे पहनकर जहाँ आग जलाई जाती है वहाँ पर एकत्रित हो जाते हैं | सभी
लोग एक दूसरे के गले मिलते हुए खुशियाँ बाँटते हैं | इसके बाद आग के चारों ओर गोला
बनाकर बैठते हैं और अग्निदेव के सम्मान में तिल और गजक जैसी कई चीजों को आग में चढ़ाते
हैं | इसके बाद लोग आग के चारों तरफ चलते हुए गाना गाकर नाचते हैं | पंजाबियों में
इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | लेकिन क्या आप जानते हैं
कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे असली कारण क्या है ?
अगर नहीं, तो आज हम
आपको उस कारण से रूबरू कराएँगे | जब भगवान श्रीहरि ने द्वापरयुग में देवकी के गर्भ
में जन्म लिया तब उन्हें उनके पिता वासुदेव द्वारा गोकुल में नन्द और यशोदा के यहाँ
छोड़ दिया गया | जब यह बात कंस को पता चली तब उसने कई तरह के दैत्य एवं राक्षसियाँ श्रीकृष्ण
को ख़त्म करने के लिए भेजीं लेकिन कृष्णजी उसकी हर चाल को विफल कर देते |
एक बार 'लोहिता' नाम
की राक्षसी को कंस ने बालकृष्ण को मारने गोकुल भेजा परन्तु कृष्णजी ने तो उसे खेल-खेल
में ही परास्त करके समाप्त कर दिया क्योंकि उस दिन लोग मकर संक्राति के पर्व में व्यस्त
थे एवं जब उन्हें यह पता चला तो उन्होंने उस 'लोहिता' राक्षसी के मरने की ख़ुशी में
लोहड़ी पर्व मनाने का निश्चय किया |
पंजाब में तो इस त्यौहार
को दुगुनी ख़ुशी से मनाया जाता है | वहाँ आग जलाने हेतु लकड़ी की व्यवस्था करने की ज़िम्मेदारी
वहाँ के छोटे-छोटे बच्चों को दी जाती है जो समूह बनाकर गाना गाते हुए हर घर से लकड़ी
इकठ्ठा करते हैं | इसके पीछे भी एक बड़ा रहस्य है | बहुत समय पहले एक ब्राम्हण की एक
पुत्री थी जिसे कुछ दुष्ट लोग अपने साथ जबरदस्ती उठा कर ले गए | जब यह बात एक मुसलमान
दुल्ला भट्टी को पता चली | उसने उन अपराधियों को ढूंढकर उन्हें उचित दंड दिया और उस
ब्राम्हण की बेटी को छुड़ा लिया | इसके बाद उसने उस ब्राम्हण की बेटी का विवाह एक ब्राम्हण
पुत्र से करा दिया | उसके इस नेक काम को याद करने के लिए भी लोग लोहड़ी का पर्व मानते
हैं |
लोहड़ी को सिंधी समाज
के लोग भी बड़े हर्ष से मानते हैं और उनके यहाँ इस पर्व को 'लाल लोही' को नाम से जाना
जाता है | कई किसान रबी के फसल की पैदावार के अच्छी होने कारण भी इस त्यौहार को मनाते
हैं | कहते हैं कि मकर संक्राति में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और क्योंकि
सूर्यदेव ऊर्जा एवं आग के देवता हैं | इसलिए भी इस दिन अग्निदेव की पूजा की जाती है
|
